यूपी के प्रयागराज के अलोप शंकरी शक्तिपीठ में अनूठी परंपरा, पालने में विराजती हैं मां
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यूपी के प्रयागराज में स्थित अलोप शंकरी शक्तिपीठ अपनी अनूठी धार्मिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां माता की कोई पारंपरिक मूर्ति नहीं, बल्कि पवित्र पालने और उसके नीचे स्थित कुंड की पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां इसी दिव्य स्वरूप में विराजमान हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव जब माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे थे, तब इस स्थान पर उनके दाहिने हाथ का पंजा या कलाई गिरकर अदृश्य हो गई थी।
इसी मान्यता के चलते इस धाम का नाम अलोप शंकरी पड़ा। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।अलोप शंकरी मंदिर में पूजा की परंपराएं भी खास हैं। श्रद्धालु गर्भगृह में स्थित कुंड को पवित्र मानते हैं। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त कुंड में दूध, दही और मेवे अर्पित करते हैं।
वहीं, पवित्र पालने पर रक्षा सूत्र बांधकर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं।इस शक्तिपीठ में नवदंपती वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना लेकर पहुंचते हैं। वहीं, बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए भी परिवार यहां आते हैं। नवरात्र में मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है।
मंदिर परिसर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ काल भैरव, मां शीतला, भगवान गणेश, श्री ललितेश्वर महादेव और भगवान हनुमान के मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।
बाइट: महंत यमुनापुरी जी महाराज, मंदिर प्रबंधक, महानिर्वाणी अखाड़ा
बाइट: श्रद्धालु