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यूपीः प्रयागराज का अलोप शंकरी शक्तिपीठ, जहां पालने में विराजती हैं मां, अनोखी है मंदिर की मान्यता

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
यूपीः प्रयागराज का अलोप शंकरी शक्तिपीठ, जहां पालने में विराजती हैं मां, अनोखी है मंदिर की मान्यता

प्रयागराज के अलोपीबाग में स्थित अलोप शंकरी शक्तिपीठ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पवित्र संगम के नजदीक स्थित इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां माता की पारंपरिक मूर्ति नहीं है, बल्कि लकड़ी के पवित्र पालने और उसके नीचे बने कुंड की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता सती का दाहिना हाथ या कलाई यहां गिरकर अदृश्य हो गई थी।

इसी कारण इस स्थान का नाम अलोप शंकरी पड़ा। मंदिर में श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं और पालने पर रक्षा सूत्र बांधते हैं। यहां नवदंपती वैवाहिक सुख की कामना लेकर आते हैं, जबकि बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया जाता है। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ भगवान गणेश, हनुमान, काल भैरव और मां शीतला के मंदिर भी हैं।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

अलोप शंकरी शक्तिपीठ, प्रयागराज के अलोपीबाग में स्थित, एक अनोखा धार्मिक स्थल है जहाँ माता सती की पारंपरिक मूर्ति के बजाय लकड़ी के पवित्र पालने और नीचे बने कुंड की पूजा की जाती है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि कथित तौर पर माता के दाहिने हाथ या कलाई का हिस्सा यहाँ गिरकर अदृश्य हो गया। यह विषय पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय श्रद्धा के बीच के अनोखे संयोजन को दर्शाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक कम ज्ञात तीर्थस्थल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाती है, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।