यूपी के वाराणसी में महिला स्वयं सहायता समूह से बदली महिलाओं की जिंदगी, घर बैठे कमा रहीं हजारों रुपये
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यूपी के वाराणसी के आराजी लाइन ब्लॉक के दीपा पुर गांव में महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस समूह से आराजी लाइन ब्लॉक के विभिन्न गांवों की करीब 300 महिलाएं जुड़ी हैं, जो मसाले, बेसन, दाल समेत कई उत्पाद तैयार कर उनकी पैकिंग और बिक्री कर रही हैं। स्वच्छता, शुद्धता और मानक पैकिंग का ध्यान रखते हुए इन उत्पादों को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
समूह से जुड़ी महिलाओं को बिक्री से होने वाली कमाई के साथ ही पैकिंग और प्रोसेसिंग के काम से प्रतिदिन 225 रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है। एक महिला महीने में करीब 2 हजार से 9 हजार रुपये तक कमा रही है। केंद्र पर महिलाएं सात घंटे काम करती हैं, जिसमें एक घंटे का लंच ब्रेक शामिल है। इस दौरान वे उत्पादों की पैकिंग, साफ-सफाई और अन्य कार्य करती हैं।
खास बात यह है कि महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही हैं। समूह से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के अवसर के लिए सरकार के प्रति आभार जता रही हैं।
बाइट-रीना सिंह — सेंटर इंचार्ज बाइट-सिद्धि मौर्य — कंप्यूटर ऑपरेटर
बाइट-सोनी गुप्ता — मशीन ऑपरेटर बाइट-उन्नति दीदी — समूह सदस्य
बाइट-सुनीता दीदी — सहायक
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर वाराणसी के आराजी लाइन ब्लॉक में महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की कहानी बताती है। 300 से अधिक महिलाएं मसाले, बेसन, दाल आदि उत्पाद बनाकर घर बैठे ही हजारों रुपये कमा रही हैं। यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देती है, क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और स्थानीय उत्पादन पर भरोसा बढ़ता है। समाज में लैंगिक समानता के संदेश को यह सकारात्मक रूप से मजबूत करती है, और ग्रामीण महिलाओं को अपनी आय और निर्णय शक्ति बढ़ाने